• 25 November, 2022
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आईएडीएस : महासागर में प्रभुत्व की दिशा में एक प्रमुख कदम

ब्रिगेडियर अरविंद धनंजयन (सेवानिवृत्त), सलाहकार संपादक रक्षा
रवि, 19 सितम्बर 2021   |   6 मिनट में पढ़ें

‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को आगे बढ़ाने और रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की ओर रक्षा मंत्रालय (MoD) ने 27 अगस्त को 14 एकीकृत पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) के लिए एक अनुबंध को अंतिम रूप दिया है। 1,350 करोड़ रुपये का यह रक्षा सौदा (IADS) महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स के साथ किया गया है। चयन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न निर्माताओं से प्रस्तावित प्रणालियों के व्यापक समुद्री परीक्षण किये गये। यह अनुबंध रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी)-2020 की खरीदें और बनाएं (भारतीय) श्रेणी के तहत संपन्न हुआ है। इस श्रेणी के तहत एक विदेशी मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) के सहयोग से लगे अनुबंधित भारतीय विक्रेता (इस मामले में महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स) से उपकरण के एक हिस्से का प्रारंभिक अधिग्रहण (यदि आवश्यक हुआ तो) किया जा सकता है। यह चरणबद्ध तरीके से स्वदेशी उत्पादन प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण (टीओटी) के साथ शुरू होगा, जिसमें अनुबंध के निर्मित हिस्से की लागत के आधार पर न्यूनतम 50% स्वदेशी सामग्री (आईसी) होगी। महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स के चेयरमैन श्री एसपी शुक्ला के अनुसार  “यह निजी क्षेत्र के साथ पहला बड़ा अनुबंध है जो समुद्र के भीतर पता लगाने और खतरों से सुरक्षा के लिए है”।

आईएडीएस  क्या है?

आईएडीएस की विशेषता/उपयोगिता को एएसडब्ल्यू के समग्र दायरे के संदर्भ में समझने की जरूरत है। एएसडब्ल्यू किसी भी समुद्र से संलग्न राष्ट्र के लिए अपने आप में एक अनिवार्य आवश्यकता है जिससे कि वह महासागर के एक हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए अभ्यास कर सके। कोई भी समकालीन नौसेना अपने खतरों का आकलन करते समय सतह की समुद्री संपत्तियों को अप्रत्याशित और अस्वीकार्य क्षति करने की क्षमता के साथ, उप-सतह के खतरे को सबसे गंभीर मानती है। यदि पनडुब्बियों से गंभीर खतरा है, तो एएसडब्ल्यू  क्षमताओं की अनिवार्यता को कम करके नहीं आंका जा सकता। हालाँकि, एएसडब्ल्यू  की बारीकियों पर महारत हासिल करना बहुत आसान नहीं है। पता लगाने की चुनौतियों, समय पर चेतावनी और प्रभावी कार्रवाई से ही उप-सतह के खतरे को विफल किया जा सकता है। यह एक ऐसी समस्या है जो समुद्रतटीय देशों की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं और उनके समुद्र में बढ़ती कारगुजारियों के कारण सघन होती जा रही है।

संभावित विरोधियों की विभिन्न क्षमताओं के कारण खतरे की संभावना भी अधिक जटिल हो गई है। अत्याधुनिक तकनीक से लेकर लगातार बढ़ती आयुध प्रोफ़ाइल तक, जो दुनिया के विभिन्न देशों की पनडुब्बियों (पारंपरिक / सतह पर निर्देशित /परमाणु/प्रति-मूल्य लक्ष्यों पर निर्देशित) में अपनायी जी रही है, से खतरा और बढ़ गया है। गहरे पानी एएसडब्ल्यू और उथली, तटीय तकनीकें भी प्रौद्योगिकी और कार्यान्वयन में बहुत भिन्न हैं। एक अन्य पहलू जो कुशल एएसडब्ल्यू प्रौद्योगिकी को प्रभावित करता है, वह वास्तविक और परिचालन संबंधी प्रशिक्षण के बारे में सीमाबद्धता है। युद्ध के दायरे में यह एक अदृश्य और अशुभ खतरे का सबब हो सकता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के उदाहरणों के अलावा, पनडुब्बियों द्वारा किए जा सकने वाले नुकसान का एक जीवंत उदाहरण 1982 का ब्रिटिश-अर्जेंटीना फ़ॉकलैंड आइजलैंड वॉर है। ब्रिटिश परमाणु पनडुब्बी, एचएमएस कॉन्क्वेरर ने अर्जेंटीना क्रूजर, जनरल बेलग्रानो पर तीन टॉरपीडो दागे। इनमें से दो टॉरपीडो युद्धपोत से टकराए, जिससे वह बीस मिनट के भीतर ही डूब गया, फलस्वरूप इस युद्ध में अंग्रेजों की जीत हुई। हालांकि,  अर्जेंटीना की एकमात्र डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन, एआरए सैन लुइस ने रॉयल नेवी का विरोध जारी रखा, जिसमें दो पनडुब्बी रोधी युद्धपोत भी शामिल थे। अगर सैन लुइस किसी एक पोत को नुकसान पहुंचाने या डूबाने में कामयाब होता, तो ब्रिटिश जीत इतनी आसानी से हासिल नहीं होती या बिल्कुल भी हासिल नहीं होती। पांच परमाणु पनडुब्बियों के शस्त्रागार से 200 से अधिक पनडुब्बी रोधी हमलों के बावजूद अर्जेंटीना की पनडुब्बी सैन लुइस बिना किसी नुकसान के वापस लौट आयी। यह राउंड द क्लॉक एयरबोर्न ASW ऑपरेशन के बावजूद ब्रिटिश बेड़े की सही-सही पता लगाने में अक्षमता की ओर इशारा करता है।

उपरोक्त सभी पहलू मौजूदा एएसडब्ल्यू क्षमताओं के एक यथार्थवादी और खतरे से प्रेरित पुनर्मूल्यांकन की अपरिहार्य आवश्यकता की ओर इशारा करते हैं जिसे किसी भी समुद्री राष्ट्र द्वारा एएसडब्ल्यू प्रौद्योगिकी की आधुनिक और परिप्रेक्ष्य आवश्यकताओं पर पहुंचने के लिए किया जाना चाहिए। एएसडब्ल्यू,  कई तकनीकों/प्रक्रियाओं का समूह है, जिसमें दुश्मन की पनडुब्बियों और उपसतह से लॉन्च किए गए हथियारों का पता लगाना/ट्रैकिंग/विनाश शामिल है। इसका उद्देश्य अंतत: उप-सतहीय खतरों का प्रतिरोध करना है। एक कुशल और उत्तरदायी परिचालन प्रणाली में सेंसर’ और ‘शूटर’ (सक्रिय/निष्क्रिय ASW डिलीवरी सिस्टम) को एकीकृत करने के साथ साथ  हवाई संपत्ति को भी शामिल करना आवश्य़क है। आईएडीएस एक ऐसा ‘सिस्टम-ऑफ़ सिस्टम’ है जिसे पानी के नीचे के खतरों के लिए एक एकीकृत प्रतिक्रिया प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो नौसेना के युद्धपोतों और अन्य सतहीय संपत्तियों को सुरक्षा प्रदान करता है।

फ़ॉकलैंड युद्ध में यदि रॉयल नेवी या अर्जेंटीना क्रूजर के पास एक कुशल IADS सुइट होता, तो परिणाम काफी भिन्न होते। इसलिए सफल ASW संचालन में प्रभावी तैनाती रणनीतियों के साथ सेंसर और हथियार प्रौद्योगिकियों का संयोजन शामिल होता है। आमतौर पर, ISR संसाधनों का उपयोग पहले लक्ष्य पनडुब्बी का पता लगाने, फिर उसे पहचानने, पता लगाने और ट्रैकिंग के लिए किया जाएगा। इसीलिए सेंसर ASW का एक प्रमुख भाग हैं। खतरे को समाप्त करने के लिए आसमान, सतह और पानी के नीचे के प्लेटफार्मों से टॉरपीडो या समुद्र के भीतर माइंस सहित पनडुब्बी रोधी आयुधों के जरिये हमले किये जायेंगे। ASW क्षमता को सामरिक क्षेत्र में अनिवार्य बल गुणक के रूप में माना जाता है, विशेष रूप से आज के परमाणु संचालित हंटर किलर पनडुब्बियों के युग में, जो समुद्र से परमाणु टिप्ड क्रूज/बैलिस्टिक मिसाइलों को लॉन्च करने में सक्षम हैं।

एक प्रभावी आईएडीएस सूट विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एएसडब्ल्यू प्लेटफार्मों के बीच सेंसर और हथियारों के एकीकरण और उपयोग को सक्षम करेगा। (उदाहरण स्वरूप गहरे बनाम कम पानी वाले एंटी सबमेरीन का संचालन)। इसके लिए सॉफ्टवेयर, मजबूत कनेक्टिविटी, अग्नि नियंत्रण और डिसिजन सपोर्ट सिस्टम को प्रभावी करेगा। साथ ही मल्टी-प्लेटफ़ॉर्म/मल्टी-एसेट ASW क्षमता प्राप्त करने के लिए उपलब्ध प्लेटफ़ॉर्म, सेंसर/शूटर और कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर, इंटेलिजेंस, सर्विलांस एंड टोही (C4ISR) इन्फ्रास्ट्रक्चर को एकीकृत करने के लिए सपोर्ट सिस्टम प्रदान करेगा।

आईएडीएस पेरिफेरल्स

महिंद्रा डिफेंस के आईएडीएस सुइट की विशेषताएं

सशस्त्र बलों के टेक्नॉलॉजी पर्सपेक्टिव एंड कैपेबिलिटी रोड मैप (टीपीसीआर) के अधिग्रहण प्रक्रिया के उत्प्रेरक के रूप में, आईएन के स्टाफ आवश्यकता निदेशालय ने जून 2013 में सूचना के लिए एक अनुरोध (आरएफआई) जारी किया, जिसमें कहा गया था कि नौसेना की IADS सुइट की मांग है जिसमें टोड एरे सोनार, एक एंटी-टारपीडो डिकॉय सिस्टम और एक संबद्ध अग्नि-नियंत्रण प्रणाली के साथ पूरी तरह से एकीकृत किया जा सकता है।

टीपीसीआर रक्षा उद्योग को उस दिशा में अवलोकन प्रदान करने के इरादे से बनाया गया है जिसमें सशस्त्र बल अगले 15 वर्षों में क्षमता के मामले में विकास का इरादा रखते हैं,  और जो उनकी विकास प्रक्रिया में बदलती प्रौद्योगिकी के परिवर्तन के अनुकूल होगा। यह अब सशस्त्र बलों की 10 साल की एकीकृत क्षमता विकास योजना (आईसीडीपी) पर आधारित है, जो दूरदर्शी रणनीतिक प्रवृत्तियों के आधार पर उनकी क्षमता की पहचान करता है। इससे तत्काल प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय पंचवर्षीय योजनाओं और दो साल की वार्षिक अधिग्रहण योजना (एएपी) के साथ-साथ चलने वाली प्रतिबद्ध वित्त पोषण के साथ पांच साल की रक्षा पूंजी अधिग्रहण योजना (डीसीएपी) संचालित होती है।

ASW के लिए TPCR  की प्रविष्टि यह स्पष्ट करती है कि पनडुब्बियां समुद्र में जहाजों के लिए प्रमुख खतरों में से एक बनी रहेंगी। इसलिए, विस्तारित सीमाओं पर जल्दी पता लगाना, मूवमेंट की लगातार निगरानी करने और प्रभावी कार्रवाई करने की क्षमता एक पूर्व आवश्यकता होगी। जैसा कि टीपीसीआर बताता है, इसे बेहतर हवाई/जहाज/तटीय पानी के भीतर बहु-स्पेक्ट्रल पहचान, स्थानीयकरण और पहचान के माध्यम से समुद्र तट तक पहुंचाया जाएगा; दूरस्थ पूछताछ और अप्राप्य ASW सेंसर क्षेत्रों का प्रसार; और एएसडब्ल्यू सूचना और डेटा को पनडुब्बियों और सतह के जहाजों के साथ साझा करने के लिए बेहतर डेटा-लिंक क्षमता के जरिये हासिल किया जायेगा।

सतह पर स्थित उपकरण तब ऐसे पहचाने गए और प्राथमिकता वाले पानी के नीचे के खतरों का मुकाबला करने के तरीकों को नियोजित करेंगे। टीपीसीआर, इंटेलिजेंट माइंस, हवा से लॉन्च किए गए टॉरपीडो और हथियारयुक्त ASW मानवरहित हवाई वाहन (UAV) को शामिल करने के लिए विकास पर विचार करेगा।  इन प्रौद्योगिकियों के अलावा, नौसेना के एएसडब्ल्यू ने हाल ही में कमोर्टा क्लास एएसडब्ल्यू स्टील्थ कॉर्वेट्स को शामिल करने के लिए विस्तार किया है। एएसडब्ल्यू शैलो वाटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी), कील को भविष्य में शामिल करने के लिए शिलान्यास समारोह 06 अगस्त को हुआ था, जिससे एएसडब्ल्यू क्षमता को और बढ़ावा मिलेगा। ASW SWC  अत्याधुनिक अंडरवाटर सेंसर और हथियारों से लैस होगा। भारतीय नौसेना (आईएन) द्वारा समन्वय, मल्टी-सेंसर डेटा फ्यूजन (MSDF) और उपरोक्त सभी ASW संसाधनों का अग्नि नियंत्रण IADS सुइट की क्षमताओं के संदर्भ की शर्तों को तैयार करेगा।

भारतीय नौसेना (आईएन) द्वारा खतरे के मूल्यांकन के आधार पर, आईएडीएस सूट फील्ड मूल्यांकन परीक्षण (एफईटी) के दौरान सिस्टम के प्रदर्शन के मूल्यांकन के परिणामस्वरूप फील्ड मिशन आर्किटेक्चर को डिजाइन/परिष्कृत करेगा। सिस्टम आर्किटेक्चर और क्षमताओं को खतरे के आकलन और परिचालन आवश्यकताओं पर आधारित होने की आवश्यकता होगी (उदाहरण स्वरूप- कम/तटीय जल में उप-सतह खतरों या एक परिकल्पित गहरे समुद्र के खतरे का संचालन/अपेक्षित), कम से कम 10 साल का आईसीडीपी के आधार पर आईएडीएस सूट को विकसित करने की आवश्यकता होगी, जो एक समान अस्थायी खतरे को भांप सकेगा।

उपलब्ध इनपुट के अनुसार, महिंद्रा डिफेंस IADS सुइट में दुश्मन की पनडुब्बियों और टॉरपीडो का पता लगाने के लिए विस्तारित रेंज के साथ-साथ आने वाली पनडुब्बी से चलने वाले टॉरपीडो को हटाने के लिए एकीकृत क्षमता की सुविधा होने की संभावना है। सूइट में युद्धपोतों के सभी वर्गों को शामिल करने की बहुमुखी क्षमता होगी। इसके अलावा, सिस्टम की एक प्रणाली होने के नाते, IADS में उन्नत टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम (ATDS) और एक्टिव टोड सोनार सिस्टम (ACTAS) को भी एकीकृत करने की संभावना है, जिन्हें नौसेना में शामिल किया गया है।

निष्कर्ष

भारतीय नौसेना अपनी पनडुब्बी रोधी पहचान और प्रतिक्रिया प्रणालियों को लगातार उन्नत कर रही है। इन प्रणालियों की अधिकतम दक्षता वास्तविक समय एमएसडीएफ और खतरे की शमन प्रणालियों के समन्वय से ही हासिल होगी। इस तरह सही समय पर समन्वय और एकीकरण के लिए सिस्टम ऑफ सिस्टम्स को IADS के रूप में शामिल करना आवश्यक होगा, ताकि इस तरह के सर्वव्यापी और घातक समुद्री खतरों के लिए भारतीय नौसेना के प्रतिरोध को और धारदार बनाया जा सके।

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मुख्य तस्वीर स्रोत : gdmissionsystems.ca


लेखक
ब्रिगेडियर अरविंद धनंजयन (सेवानिवृत्त) एक आपरेशनल ब्रिगेड की कमान संभाल चुके हैं और एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र के ब्रिगेेडयर प्रभारी रहे हैं। उनका भारतीय प्रशिक्षण दल के सदस्य के रूप में दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना में विदेश में प्रतिनियुक्ति का अनुभव रहा है और विदेशों में रक्षा बलों विश्वसनीय सलाहकार के रूप में उनका व्यापक अनुभव रहा है। वह हथियार प्रणालियों के तकनीकी पहलुओं और सामरिक इस्तेमाल का व्यापक अनुभव रखते हैं।

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POST COMMENTS (1)

INDIAN FAUZI

अक्टूबर 20, 2021
sir ji aap thoda aour improve keejiye buffering bahut karta hai

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