• 23 April, 2024
Geopolitics & National Security
MENU

अंटार्कटिका के ‘प्रलयंकारी’ ग्लेशियर से दुनियाभर में आएगी बाढ़

भाषा एवं चाणक्य फोरम
शुक्र, 24 दिसम्बर 2021   |   4 मिनट में पढ़ें

रीडिंग (यूके), 23 दिसंबर (द कन्वरसेशन) : पश्चिम अंटार्कटिका के विशाल थ्वाइट्स ग्लेशियर में इतनी बर्फ है कि अगर यह पूरी तरह से ढह जाए तो वैश्विक समुद्र का स्तर 65 सेमी तक बढ़ा सकता है। और, चिंताजनक रूप से, हाल के शोध से पता चलता है कि इसकी दीर्घकालिक स्थिरता संदिग्ध है क्योंकि ग्लेशियर से बर्फ लगातार गिर रही है।

वैश्विक समुद्र के स्तर में अगर 65 सेमी की वृद्धि हुई तो उससे पूरी तट रेखा बदल जाएगी। इसे इस तरह और बेहतर समझ सकते हैं कि 1900 के बाद से समुद्र के स्तर में लगभग 20 सेमी की वृद्धि हुई है, इस वृद्धि के परिणामस्वरूप तटीय इलाकों में रहने वाले समुदाय अपने घरों से बाहर निकालने के लिए मजबूर हो चुके हैं और बाढ़, खारे पानी के दूषित होने और आवास के नुकसान जैसी पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ रही हैं।

लेकिन चिंता की बात यह है कि थ्वाइट्स, जिसे इस क्षेत्र में इसकी मुख्य भूमिका के कारण कभी-कभी ‘‘प्रलयंकारी ग्लेशियर’’ कहा जाता है, अगर गिरता है तो वह ऐसा अकेला ग्लेशियर नहीं होगा। यदि इसकी बर्फ समुद्र में गिरी तो इसकी एक श्रृंखलाबद्ध प्रतिक्रिया होगी और इसके साथ आस-पास के अन्य ग्लेशियर भी धराशाई हो जाएंगे, जिसका अर्थ होगा समुद्र के स्तर में कई मीटर की वृद्धि।

ऐसा इसलिए है क्योंकि पश्चिम अंटार्कटिका के ग्लेशियरों को मरीन आइस क्लिफ इन्स्टैबिलिटी या एमआईसीआई नामक एक तंत्र के कारण कमजोर माना जाता है, जहां बर्फ के हटने से विशाल और अस्थिर हिम चट्टानें उजागर होकर समुद्र में गिरती हैं।

समुद्र के जल स्तर में कई मीटर की वृद्धि दुनिया के कई प्रमुख शहरों को जलमग्न कर देगी – जिनमें शंघाई, न्यूयॉर्क, मियामी, टोक्यो और मुंबई शामिल हैं। यह तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भूमि को भी कवर करेगा और बड़े पैमाने पर किरिबाती, तुवालु और मालदीव जैसे निचले द्वीप राष्ट्रों को निगल जाएगा।

ब्रिटेन जितना बड़ा

थ्वाइट्स लगभग ग्रेट ब्रिटेन के आकार की बर्फ की जमी हुई नदी है। यह पहले से ही वैश्विक समुद्र-स्तर में वृद्धि का लगभग 4% योगदान देता है। 2000 के बाद से, ग्लेशियर को 1000 अरब टन से अधिक बर्फ का शुद्ध नुकसान हुआ है और यह पिछले तीन दशकों में लगातार बढ़ा है। 30 वर्षों में इसके प्रवाह की गति दोगुनी हो गई है, अर्थात 1990 के दशक की तुलना में दोगुनी बर्फ समुद्र में जा रही है।

80 मील चौड़ा थ्वाइट्स ग्लेशियर, दुनिया का सबसे चौड़ा ग्लेशियर है, इसे बर्फ के एक तैरते हुए प्लेटफॉर्म, जिसे आइस शेल्फ कहते हैं, ने अपनी जगह पर रोक रखा है। यह प्लेटफार्म ग्लेशियर को रोकता है और इसके बहने की रफ्तार को भी कम करता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने अभी-अभी इस बात की पुष्टि की है कि यह बर्फ का प्लेटफार्म तेजी से अस्थिर हो रहा है। ओरेगॉन स्टेट यूनिवर्सिटी के एक ग्लेशियोलॉजिस्ट एरिन पेटिट के अनुसार, पूर्वी बर्फ के शेल्फ की सतह पर आड़ी तिरछी दरारें आ चुकी हैं, और दस साल के भीतर यह ढह सकता है।

2020 में प्रकाशित एक शोध भी इस बात का समर्थन करता है जिसमें थ्वाइट्स आइस शेल्फ़ पर दरारें और दरारों के विकास का भी उल्लेख किया गया है। ये संकेत देते हैं कि यह संरचनात्मक रूप से कमजोर हो चुका है।

यदि थ्वाइट्स की बर्फ की शेल्फ ढह गई, तो यह ग्लेशियर के अंत की शुरुआत होगी। अपने बर्फ के शेल्फ के बिना, थ्वाइट्स ग्लेशियर अपनी सारी बर्फ समुद्र में छोड़ देगा।

अन्य अस्थिर हिमनद

आइस शेल्फ – जिसे थ्वाइट्स ग्लेशियर का तैरता हुआ विस्तार माना जा सकता है – कई में से एक है जिसे वैज्ञानिक अमंडसन सी बेसिन, वेस्ट अंटार्कटिका में करीब से देख रहे हैं। कई बर्फ की तहें जो वहां के ग्लेशियरों को थामे रखती हैं, जिनमें थ्वाइट्स और उसके आसपास के ग्लेशियर, पाइन आइलैंड ग्लेशियर शामिल हैं, समुद्र के बढ़ते तापमान से नष्ट हो रहे हैं।

गर्म समुद्र का पानी इन तैरती हुई बर्फ की तहों को कम करने में सक्षम है, जो नीचे से बर्फ को पिघलाकर इसकी परत को पतला कर सकती है और इसे कमजोर कर सकती है, जिससे सतह पर देखी गई दरारें और फ्रैक्चर विकसित हो सकते हैं। बर्फ की तहों की निचली परत के पिघलने से उस एंकरिंग बिंदु को भी नुकसान पहुंच सकता है, जहां बर्फ समुद्र के किनारे से पीछे की ओर मिलती है। अमडसन सागर में समुद्र का ढलान चूंकि नीचे की ओर है, तो ऐसे में अगर ग्लेशियर तेजी से पिघले तो दुनियाभर में बड़े बदलाव आ सकते हैं।

अंततः, यदि बर्फ की तहें अपनी जगह छोड़ देती हैं तो इसका मतलब है कि पश्चिम अंटार्कटिक ग्लेशियरों को थामे रखना मुश्किल होगा – जिससे वह तेजी से टूटेंगे और समुद्र के स्तर में भारी वृद्धि करेंगे।

हालाँकि, वैज्ञानिक अभी भी एमआईसीआई को लेकर विचार कर रहे हैं और पश्चिम अंटार्कटिक ग्लेशियरों के भविष्य के बारे में सवाल बने हुए हैं। जबकि थ्वाइट्स का पतन निश्चित रूप से एक बड़े पतन की घटना का कारण बन सकता है, सभी को विश्वास नहीं है कि ऐसा होगा।

कुछ अन्य लोगों का यह भी विचार है कि थ्वाइट्स की बर्फ की तहें और ग्लेशियर के अस्थिर होने से उस तरह के भयावह परिणाम नहीं होंगे जिनसे डरने की जरूरत हो। उनके अनुसार बर्फ के विशाल टुकड़े जो ग्लेशियर और प्लेटफार्म की परतों से टूटेंगे, ग्लेशियर के पतन को रोकने का काम भी कर सकते हैं।

पश्चिम अंटार्कटिका में वास्तव में क्या होगा, इस बारे में अनिश्चितता बनी हुई है, एक बात निश्चित है – थ्वाइट्स ग्लेशियर से गिरने वाली बर्फ आने वाले कई वर्षों तक वैश्विक समुद्र के स्तर को बढ़ाना जारी रखेगी।

(एला गिल्बर्ट, रीडिंग विश्वविद्यालय)

**********************************************************



अस्वीकरण

इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं और चाणक्य फोरम के विचारों को नहीं दर्शाते हैं। इस लेख में दी गई सभी जानकारी के लिए केवल लेखक जिम्मेदार हैं, जिसमें समयबद्धता, पूर्णता, सटीकता, उपयुक्तता या उसमें संदर्भित जानकारी की वैधता शामिल है। www.chanakyaforum.com इसके लिए कोई जिम्मेदारी नहीं लेता है।


चाणक्य फोरम आपके लिए प्रस्तुत है। हमारे चैनल से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें (@ChanakyaForum) और नई सूचनाओं और लेखों से अपडेट रहें।

जरूरी

हम आपको दुनिया भर से बेहतरीन लेख और अपडेट मुहैया कराने के लिए चौबीस घंटे काम करते हैं। आप निर्बाध पढ़ सकें, यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी टीम अथक प्रयास करती है। लेकिन इन सब पर पैसा खर्च होता है। कृपया हमारा समर्थन करें ताकि हम वही करते रहें जो हम सबसे अच्छा करते हैं। पढ़ने का आनंद लें

सहयोग करें
Or
9289230333
Or

POST COMMENTS (0)

Leave a Comment