• 25 June, 2022
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अमेरिका और चीन को करीब लाने में पाक फिर ‘अहम भूमिका’ निभाने को तैयार : इमरान


गुरु, 10 फरवरी 2022   |   2 मिनट में पढ़ें

इस्लामाबाद, नौ फरवरी (भाषा): पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि इस्लामाबाद के चीन और अमेरिका, दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं और वह ‘एक और शीत युद्ध’ को टालने के लिए ‘1970 के दशक सरीखी अहम भूमिका’ निभाना चाहता है, जिसकी बदौलत बीजिंग और वाशिंगटन करीब आए थे।

अमेरिका और चीन के रिश्ते अब तक के सबसे निचले स्तर पर हैं। दोनों देश के बीच व्यापार, विवादित दक्षिण चीन सागर में बीजिंग के आक्रामक सैन्य कदम और हांगकांग, तिब्बत व शिनजियांग क्षेत्र में मानवाधिकारों के उल्लंघन सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर तनाव है।

एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान ने मंगलवार को बताया कि इमरान ने चीन के सरकारी न्यूज चैनल ‘सीजीटीएन’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि दुनिया को ऐसी स्थिति से नहीं गुजरना चाहिए, जिसमें वह दो खेमों में बंट जाए, क्योंकि इससे किसी को कोई फायदा नहीं होगा।

2022 के शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए हाल ही में बीजिंग गए इमरान चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी से पाकिस्तान के सामने पेश आने वाली संभावित चुनौतियों से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि यह (अमेरिका और चीन के बीच तनाव) एक और शीत युद्ध का रूप नहीं अख्तियार करेगा, जहां हमें किसी एक को चुनना होगा।’

पाक प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारे चीन और अमेरिका, दोनों के साथ अच्छे रिश्ते हैं। हम 1970 के दशक की भूमिका निभाना चाहते हैं, जब पाकिस्तान ने अमेरिका और चीन को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।’

इमरान 1971 में चीन-अमेरिका संबंधों में ऐतिहासिक सफलता का जिक्र कर रहे थे, जो पाकिस्तान द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के कारण संभव हुई थी।

उन्होंने कहा, ‘हेनरी किसिंजर (तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री) की प्रसिद्ध यात्रा पाकिस्तान द्वारा आयोजित की गई थी, इस बार भी हम वही भूमिका निभाने की उम्मीद करते हैं।’

‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ में पिछले साल प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, किसिंजर ने ‘50 इयर्स ऑफ चाइना-यूएस रिलेशंस’ नामक एक वेबिनार में याद किया था कि कैसे तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल याह्या खान ने नौ जुलाई 1971 को इस्लामाबाद से बीजिंग तक पीआईए विमान में यात्रा कर चीन और अमेरिका के बीच गुप्त रूप से संवाद करवाने में अहम भूमिका निभाई थी।

साक्षात्कार के दौरान जब इस क्षेत्र, विशेष रूप से अफगानिस्तान पर पाकिस्तान-चीन के ‘रणनीतिक संबंधों’ के असर के बारे में पूछा गया तो इमरान ने कहा कि इस्लामाबाद और बीजिंग के बीच इस मुद्दे पर आम सहमति है कि दोनों पक्ष क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि के लिए कैसे सहयोग कर सकते हैं।

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