• 29 September, 2022
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थलसेना, असम राइफल्स के छह जवानों को शौर्य चक्र मिला


बुध, 26 जनवरी 2022   |   4 मिनट में पढ़ें

नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा): भारतीय सेना के पांच जवानों को आतंकवादियों का मुकाबला करते हुए असाधारण वीरता प्रदर्शन के लिए मंगलवार को मरणोपरांत शांति के समय के तीसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

सेना ने एक बयान में कहा कि इसके अलावा उग्रवाद रोधी अभियान के दौरान असाधारण बहादुरी दिखाने के लिए गणतंत्र दिवस के अवसर पर असम राइफल्स के एक सेवारत सैनिक को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।

भारतीय सेना ने मंगलवार को गणतंत्र दिवस 2022 के अवसर पर वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए सम्मानित किए गए सैन्य कर्मियों की सूची जारी की।

सेना ने कहा कि शौर्य चक्र से सम्मानित किए गए छह कर्मियों के साथ, 19 कर्मियों को परम विशिष्ट सेवा पदक (पीवीएसएम) से सम्मानित किया गया है, 33 को अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) से और 77 सैन्यकर्मियों को विशिष्ट सेवा पदक (वीएसएम) से सम्मानित किया गया है।

बयान में कहा गया कि चार कर्मियों को उत्तम युद्ध सेवा पदक (यूवाईएसएम) से सम्मानित किया गया है, 10 को युद्ध सेवा पदक (वाईएसएम), 84 को सेना पदक (वीरता) और 40 सैन्यकर्मियों को सेना पदक (विशिष्ट सेवा) से सम्मानित किया गया है।

भारतीय सेना के अनुसार, आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान असाधारण वीरता प्रदर्शन के लिए कुल पांच सैनिकों – नायब सूबेदार श्रीजीत एम, हवलदार अनिल कुमार तोमर, हवलदार काशीराय बम्मनल्ली, हवलदार पिंकू कुमार और सिपाही मारुप्रोलू जसवंत कुमार रेड्डी को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है।

इसने कहा कि राइफलमैन राकेश शर्मा को भी असम में विद्रोहियों से लड़ते समय असाधारण बहादुरी दिखाने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है।

भारतीय सेना ने कहा कि नायब सूबेदार श्रीजीत एम ने आठ जुलाई 2021 को जम्मू-कश्मीर के घने जंगलों में तलाशी अभियान के दौरान ‘आमने-सामने की मुठभेड़’ में एक आतंकवादी को मार गिराया।

बयान में कहा गया है कि श्रीजीत ने खुद को उस क्षेत्र से सुरक्षित जगह ले जाए जाने से इनकार कर दिया और अपनी चोटों के कारण दम तोड़ने से पहले गोलियां चलाना जारी रखा।

सेना ने कहा कि 25 दिसंबर, 2020 को हवलदार अनिल कुमार तोमर कश्मीर में एक घेराबंदी और तलाशी अभियान चला रहे थे, जब वह आतंकवादियों की भारी गोलीबारी की चपेट में आ गए।

इसने कहा कि इस दौरान कुमार को गोली लगी, लेकिन अत्यंत साहस का परिचय देते हुए उन्होंने सटीक गोलीबारी से एक आतंकवादी को मार गिराया और एक घर के अंदर छिपे एक अन्य आतंकवादी का पीछा किया तथा उसे घेर लिया और उसे भी ढेर कर दिया।

बयान में कहा गया, ‘उन्हें उस स्थान से सुरक्षित जगह ले जाया गया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया और कर्तव्य निभाते हुए अपना बलिदान कर दिया।’

सेना ने कहा कि एक जुलाई, 2021 को हवलदार काशीराय बम्मनल्ली कश्मीर के पुलवामा में एक घेराबंदी और तलाशी अभियान चला रहे थे, जब आतंकवादियों ने ग्रेनेड फेंककर और अंधाधुंध गोलीबारी कर भागने की कोशिश की।

बयान में कहा गया है, ‘सीने पर गंभीर चोट लगने के बावजूद, उन्होंने सटीक गोलियां चलाईं और आतंकवादी का सफाया कर दिया।’

सेना ने कहा कि अत्यधिक खून बहने और खतरा होने के बावजूद बम्मनल्ली एक सुविधाजनक स्थान पर रेंगते हुए आगे बढ़े और पास से तीन अन्य आतंकवादियों को मार गिराया, जिससे उनकी टीम के सदस्यों की जान बच गई। बाद में, बम्मनल्ली ने भी दम तोड़ दिया और देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

इसमें कहा गया है कि हवलदार पिंकू कुमार पिछले साल 27 मार्च को कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान आंतरिक घेराबंदी का हिस्सा थे।

सेना ने कहा कि जब दो आतंकवादियों ने घेराबंदी से बाहर भागने की कोशिश की, तो हवलदार पिंकू कुमार ने अपनी स्थिति को फिर से बदल दिया और सटीक गोलाबारी की, जिसमें एक आतंकवादी मारा गया।

इसने कहा कि कुमार ने दूसरे आतंकवादी को भी घायल कर दिया, लेकिन उनके सिर पर भी एक गोली लगी और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया।

बयान में कहा गया है कि सिपाही मारुप्रोलू जसवंत कुमार रेड्डी पिछले साल आठ जुलाई को कश्मीर के घने जंगलों में एक तलाशी अभियान चला रहे थे कि आतंकवादियों से उनका आमना-सामना हो गया और उन्होंने उनमें से एक आतंकवादी को आमने-सामने की मुठभेड़ में मार गिराया।

सेना ने कहा कि जब वह अन्य आतंकवादियों को ढेर करने के लिए आगे बढ़े तो उन्होंने देखा कि उनका सैन्य टीम कमांडर आतंकवादियों की गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हो गया है।

इसने कहा कि रेड्डी ने तुरंत आतंकवादियों पर हथगोले फेंके और अपने टीम कमांडर की ओर तेजी से रेंगते हुए आगे बढ़े।

बयान में कहा गया है, ‘ऐसा करते समय वह आतंकवादियों की भारी गोलाबारी की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह किए बिना उन्होंने आतंकवादियों पर जवाबी कार्रवाई जारी रखी और अपनी चोटों के कारण मरने से पहले अपने टीम कमांडर को सुरक्षित जगह खींच लिया।’

राइफलमैन राकेश शर्मा पिछले साल 22-23 मई को असम में उग्रवाद रोधी एक अभियान का हिस्सा थे।

सेना ने कहा कि उन्होंने दो उग्रवादियों को घने पेड़-पौधों की आड़ में भागते हुए देखा।

इसने कहा, ‘उन्होंने तुरंत अपने सहयोगी के कवरिंग फायर के बीच उग्रवादियों का पीछा किया और बचकर भागने के उनके मार्ग को अवरुद्ध कर दिया।’

बयान में कहा गया कि शर्मा ने भाग रहे एक उग्रवादी को गोली से उड़ा दिया, लेकिन वह दूसरे उग्रवादी की भारी गोलाबारी की चपेट में आ गए।

सेना ने कहा कि वह तुरंत एक गिरे हुए पेड़ की आड़ लेकर आगे बढ़े और ‘‘शानदार गोलीबारी’’ का प्रदर्शन करते हुए दूसरे उग्रवादी को भी मार गिराया।

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